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VVPAT में लगायी जा सकती है सेंध

#VVPAT में लगायी जा सकती है सेंध: एक ख़ुलासा “VVPAT में पलक झपकते ही ऐसा सॉफ्टवेअर ड़ाला जा सकता है कि बटन दबाने पर ‘बीप’ की आवाज़ हो, सही लाइट भी जले, पेपर प्रिंट होकर दिखे तो सही लेकिन EVM की मेमोरी चिप (EPROM IC etc.) में वोट सिर्फ़ किसी पूर्वनिश्चित पार्टी, मसलन भाजपा का ही दर्ज हो. इन सॉफ्टवेयर की ख़ासियत ये होती है कि इन्हें इस तरह प्रोग्राम किया जाता है कि टेस्टिंग के वक़्त 100-500 वोट्स तक या सुबह 10 बजे तक ये बिल्कुल सही काम करे और एक निश्चित घड़ी के समय अनुसार Clock Timer चिप

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महिला दिवस

महिला दिवस पर याद करने योग्य बातें

महिला दिवस पर याद करने योग्य बातें.. जिन्हें याद करना जरूरी है क्योंकि ये उन अत्याचार की दास्तान है जो कभी महिलाओं पर हुआ करते थे खासकर निचली जाति की महिलाओं पर…. केरल के त्रावणकोर के ब्राह्मण राज्य में गैरब्राह्मण महिलाओं को स्तन ढकने की मनाही थी साथ ही महिलाओं पर स्तन टैक्स लगाया जाता था. वे बिना टैक्स चुकाए अपने नवजात शिशु को अपने ही स्तन से दूध नही पिला सकतीं थीं. केरल के चेर्थाला की गरीब महिला नांगेली के पास टैक्स चुकाने के लिए पैसे नही थे और जब वे माँ बनीं तो अपने ही नवजात शिशु से

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मुहम्मद शरीफ उर्फ नसीम हिजाज़ी

मुहम्मद शरीफ जो कि आमतौर पर अपने छद्म नाम नसीम हिजाज़ी द्वारा जाने जाते थे (C. 1914- मार्च 1996), एक उर्दू लेखक थे जो इस्लामी इतिहास से संबंधित अपने उपन्यासों के लिए प्रसिद्ध हैं। उनका जन्म प्री-पार्टिशन इंडिया में वज़ीराबाद में एक Arain परिवार में हुआ था और 1947 में ब्रिटिश शासन और बाद में भारत के विभाजन (अथवा आज़ादी) के बाद पाकिस्तान चले गए। उन्होंने अपना अधिकांश जीवन पाकिस्तान में गुजारा और मार्च 1996 में उनका निधन हो गया। एक उपन्यास लेखक के रूप में, नसीम हिजाज़ी को उर्दू भाषा के सबसे बेहतरीन लेखकों में से एक माना जाता

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लिट्टी चोखा

बिहार का सुप्रसिद्ध व्यंजन: लिट्टी चोखा

मेधा की शादी बिहार में बड़ी ही धूमधाम से हुई,मेधा विदाई होकर अपने ससुराल में आई तो सभी ने उसको बहुत प्यार व सम्मान दिया।चार दिन तक अधिकतर मेहमान जा चुके थे। शादी के पांचवे दिन मेधा की पहली रसोई थी। यूं तो मेधा बचपन से ही बहुत मेधावी थी। पढ़ाई के साथ साथ घर के भी सभी कामों में निपुण थी पर ससुराल की बात ही कुछ और होती है,उसे बहुत डर लग रहा था कि वह क्या बनाए पता नहीं उसका बनाया किसी को पसंद भी आयेगा या नहीं। मां भी नहीं थी ,उसके परिवार में बस बड़ी

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नाटक

नाटक

कुछ बीते बरस की बातें याद आ गयी , शेयर कर रहा हूँ बस्स ! वो सर्द दिन ही थे , सांझ जल्दी ढलने की कोशिश में थी और नाटक अभी शुरू ही नहीं हुआ था , नादिरा.. उस दिन बहुत उदास थी … क्यूंकि दोपहर को ही उसने मुझसे कहा था सन्दीप , मुझे अब पूना जाना है , पापा का ट्रांसवर हो गया है ! मैंने कहा था , हमारी उन कसमों का क्या होगा जो हमने अगले जन्म तक के लिए ले रखी है बस मुँह फेर कर वह चलने लगी , मैंने फिर कहा , मिलते

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भारत के राष्ट्रपिता महात्मा ज्योतिबा फुले

जन्म: 11 अप्रैल 1827 कटगुन, सतारा जिला, महाराष्ट्र, भारत पिता का नाम: गोविंदराव माता का नाम: विमलाबाई अन्य नाम: महात्मा फुले / ज्योतिबा फुले / जोतिबा फुले / जोतिराव फुले पत्नी: सावित्रीबाई फुले युग: 19 वीं सदी मुख्य रुचियाँ: नैतिकता, धर्म, मानवतावाद मृत्यु: 28 नवंबर 1890 (आयु 63 वर्ष) पुणे, महाराष्ट्र, भारत महाराष्ट्र के पुणे शहर में जोतिबा फुले का जन्म दि. 11 अप्रैल 1827 में हुआ था. उनके पिता का नाम गोविंदराव और माता का नाम विमलाबाई था. एक साल की उम्र में जोतिबा की माता का निर्वाण हो गया था. ईस्ट इण्डिया कंपनी के शासन में शुद्र वर्ण(आज

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नाराजगी

हमने मुहब्बत को इबादत समझा है आज फिर तुम्हारी नाराजगी भगाने आ गए ! तबियत भी बेईमान पर जैपुरे आज आ गए देखो इन स्पीड ब्रेकरों को आज … रफ्तार को लगाम लगाने आ गए ख्याल ए ठोकर आया ही नहीं खामखा वक्त जाया कराने आ गए… आज मौसम भी कुछ ऐसा ही है कमबख्त बे-ईमान सरीका आ गए… हमने मुहब्बत को इबादत समझा है आज फिर तुम्हारी नाराज़गी भगाने आ गए !

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डायरी के पन्ने

डायरी के पन्ने दिला रही हैं आज कुछ पुरानी यादें , कभी जैपुरे में रहा करते थे हम , उस गुलाबी से मोहब्ब्ती शहर में हुजूम ओ भीड़ बहुत रहा करती थी …… एक दफा जो बिछड़ा फिर मिल नहीं पाया एकं निगोड़ी मोहब्वत भी रहा करती थी हमारी , उस शहर में , कभी ज़िन्दगी भी कहा करते थे उसे , यूँ ही खो गयी वो … उस कमबख्त भीड़ में कुछ दिन तलाश भी किया था शायद ज़िन्दगी को जल्दी थी हम थे कुछ ठहरे हुए पानी के माफिक वो बहती हवा थी सच है कुछ यादें ..

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एक दर्द

इसमे हास्य रूप में न पढ़ें एक दर्द है जिसे शब्द दिए गए है एक आदमी रात के दस बजे ब्रीफकेस लिए, सर झुकाए कुछ सोचता चला जा रहा था. रास्ते में श्मशान पड़ा. पीपल की डाल पर एक भूत और चुड़ैल चुहुल कर रहे थे. चुड़ैल बोली, “देखो, इत्ती रात में कैसा बेख़ौफ़ होकर चला जा रहा है, इस पर सवार होकर हफ्ता-दस दिन खूब सताती हूँ.” भूत बोला, “बेकार एनर्जी वेस्ट मत कर, ये बैंक में अफ़सर है, इसे अब और कोई क्या सताएगा, ये किसी भूत-चुड़ैल से डरने वाला नही. चल किसी इन्सान को पकड़ते हैं.”

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माता सावित्रीबाई फुले, भारत की पहली महिला शिक्षिका

सावित्रीबाई ज्योतिराव फुले भारत की प्रथम महिला शिक्षिका, समाज सुधारिका एवं मराठी कवयित्री थीं। उन्होंने अपने पति ज्योतिराव गोविंदराव फुले के साथ मिलकर स्त्रियों के अधिकारों एवं शिसे कार्य किए। सावित्रीबाई भारत के प्रथम कन्या विद्यालय में प्रथम महिला शिक्षिका थीं। उन्हें आधुनिक मराठी काव्य की अग्रदूत माना जाता है। जो लोग राष्ट्रमाता सावित्रीबाई फूले को नही जानते, वे कृपया इस पोस्ट को अवश्य पढ़ें.. नाम – सावित्रीबाई फूले जन्म – 3 जनवरी सन् 1831 निधन – 10 मार्च सन् 1897 उपलब्धि कर्मठ समाजसेवी जिन्होंने समाज के पिछड़े वर्ग खासतौर पर महिलाओं के लिए अनेक कल्याणकारी काम किये, उन्हें उनकी

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